“Stanley Ka Dabba” (2011) एक बेहद प्यारी और दिल को छू लेने वाली फ़िल्म है, जो एक छोटे बच्चे स्टैनली की ज़िंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है। स्टैनली एक खुशमिज़ाज, क्रिएटिव और सबका चहेता बच्चा है, लेकिन उसके पास रोज़ाना स्कूल में अपना लंच बॉक्स नहीं होता। उसकी क्लास के बच्चे उसके अच्छे दोस्त हैं, मगर स्कूल का एक लालची टीचर वर्मा सर सिर्फ बच्चों का खाना छीनकर खाने के लिए बदनाम है। जब उसे पता चलता है कि स्टैनली अपना डब्बा लाने में असमर्थ है, तो वह उसे ताने देने और परेशान करने लगता है। धीरे-धीरे कहानी में खुलता है कि स्टैनली क्यों अपना डब्बा नहीं ला पाता — और यही हिस्सा फ़िल्म को बेहद भावुक और इंसानी बना देता है। यह फिल्म सिखाती है कि बच्चों की मासूमियत, हिम्मत और छोटे-छोटे संघर्ष भी कितने गहरे होते हैं, और कैसे प्यार, दोस्ती और समझदारी किसी भी दर्द पर मरहम लगा सकती है। अमोल गुप्ते की यह फिल्म बच्चों की दुनिया को सरल पर गहरी संवेदनाओं के साथ पेश करती है, जिसे देखने के बाद हर इंसान के दिल में एक गर्मजोशी सी भर जाती है।

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